शुक्रवार, 9 अक्टूबर 2015

******** पात्र नहीं हूँ मैं ***********

मैं किसी कहानी
किसी कथा
किसी सीरियल का
पात्र नहीं हूँ .....
जिसे तुम जब चाहो
उठाओ - गिराओ
मरवाओ
हँसाओ
रुलाओ
और तुम लिख सको -
अपनी मनमर्जी से मुझे ....
..........
हकीकत हूँ मैं
जिन्दा हकीकत
मेरी अपनी सोचें हैं
थोड़ी बहुत
इलास्टिसिटी चलेगी
ज्यादा खींचतान
करोगे - शायद
टूट भी जाऊं मैं ...
....... स्पर्शी, ग्वालियर ...

--------- "होना ही है शहीद" ----------



लगता है
मैं भी स्याला
बकरा ही हूँ !
जब जिसे हलाल
करना होता है
खूब जिमाता है
खिलाता पिलाता है
मीठी मीठी बातों की
चाशनी ही सही
खुशामद का
चिकना चिकना
मक्खन ही सही !
अंत वही -
जो हर बकरे की
किस्मत है !
हलाल होना !!
होती ही रहती है
जब तब - "बकरीद"
चाहे मिंमियाएं
चाहे मुस्कुराएं
होना ही है शहीद !!
****** राहुल गुप्ता स्पर्शी, ग्वालियर ..