शनिवार, 14 जनवरी 2012

कान्हा को मनाना आ जाये

.कान्हा के चरणों में समर्पित ..प्रथम प्रयास ...

बोलूँ बोल ..बुलाना आ जाये ...
मुझे कान्हा को मनाना आ जाये !!

मन मंदिर में कान्हा की सूरत सजाऊँ ..
कैसे दीप जलाऊँ ..कैसे भोग लगाऊं !!

दिल चीर के दिखाना आ जाये !!
मुझे कान्हा को मनाना आ जाये !!

तेरे भक्तों के बन सारे काम जायें !
राधे राधे जपूँ ..और श्याम आयें !!

मुझे माखन बरसाना आ जाये ..!
मुझे कान्हा को मनाना आ जाये !!

राहुल गुप्ता, ग्वालियर 9826347016

शुक्रवार, 13 जनवरी 2012

"यही मिले मुझको वरदान"

  • यही मिले मुझको वरदान" 
  • जब जब जो कुछ मिला मुझे
  • तब तब वो भरपूर लगा 
  • और अगर संतोष न होता
  • मैं भी स्वर्ण महल को रोता 
  • हर सुख मुझको छोटा लगता 
  • ख्वाब असंभव से होते तो 
  • कौन उन्हें पूरा कर पाता
  • उपरवाला भी तब मुझसे 
  • हाथ जोड़ लेता, कह देता 
  • तेरा मुहं सुरसा सा है जा 
  • तुझे नहीं दूंगा वरदान 
  • तेरा कोई सगा न होगा 
  • कि तुझसे हार गया भगवान
  • इसीलिए मैंने वह देखा 
  • 'स्वप्न' कि जो मेरा हो जाये 
  • 'राह' कि जिस पर मैं चल पाऊँ 
  • इसीलिए जो मिला जगत मैं 
  • मुझको सदा अपार लगा 
  • छोटे घर में ..छोटे छोटे 
  • कुछ सुख के साधन भी पाए 
  • और मित्रता में भी मुझको 
  • कुछ साथी मिल गए महान 
  • दर्द मिले कम जीवन में 
  • और ख़ुशी अनगिनत मिली 
  • मैं उनसे क्यों तोलूँ खुदको 
  • जो सोने के व्यापारी हैं 
  • या उनसे जो काले धन को 
  • बढ़ा रहे कर भ्रष्टाचार 
  • और लोग वो लूटपाट कर 
  • करते सब पर अत्याचार 
  • मैं सुख पाता हूँ जब मुझको 
  • लगता है खा सका पेट भर
  • क्योंकि यहाँ कईयों को मैंने
  • देखा सोते ..भूखे पेट 
  • या उन घर वालों को देखा
  • जिनके बच्चे उद्दंडी हैं 
  • और कहीं हैं वो बेचारे 
  • जिनके शीश महल तो हैं पर 
  • कुल दीपक तक नहीं जला है 
  • कभी कभी लगता है प्रभु ने 
  • मुझको दिए कई वरदान 
  • कम देखूं ...पर ज्यादा सोचूँ 
  • सबकी सुनूं ..खूब.. कम बोलूँ 
  • जो सुख मिले..रखूँ सर माथे 
  • जो दुःख मिलें ..उन्हें कम आंकूं
  • सपने देखूं ..छोटे छोटे !
  • औरों के कुछ काम आ सकूं 
  • यही मिले मुझको वरदान 
  • बना रहूँ सच्चा इंसान !!

  • राहुल गुप्ता, ग्वालियर 9826347016