जिन्दगी की हर ख़ुशी छोड़े हुए !
जी रहे हैं हम, कफ़न ओढ़े हुए !!
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जान से अपनी जुड़े गम ही रहे !
कभी हुए ज्यादा, कभी थोड़े हुए !!
...........जी रहे हैं हम कफ़न ओढ़े हुए !!
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रिश्ता बनता ही गया वीराने से !
बरसों हो गए ..चमन छोड़े हुए !!
...........जी रहे हैं हम कफ़न ओढ़े हुए !!
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जिसके क़दमों पे झुकी नज़रें रहीं !
चलते रहे हैं वो, कदम मोड़े हुए !!
...........जी रहे हैं हम कफ़न ओढ़े हुए !!
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दिल को तेरे प्यार में तोड़े हुए !
यादों से इस जान को जोड़े हुए !!
...........जी रहे हैं हम कफ़न ओढ़े हुए !!
..........राहुल गुप्ता स्पर्शी, ग्वालियर 9826347016