मंगलवार, 19 जून 2012

...........चेहरा तेरा


धरा के आँगन पे आसमां झुकाने आया हूँ  !
नदी की प्यास को सागर पिलाने आया हूँ !!
नज़र में बाँध लूं ..चेहरा तेरा.. खरा कुंदन !
ग़ज़ल की शान को..सोना बनाने आया हूँ !!
...........राहुल गुप्ता स्पर्शी, ग्वालियर 09826347016 

.........."मेरे आंसू" ...........


मित्रों ...पितृ दिवस ..पर पिता को खोना ....
..मेरी आह .माँ का रुदन ....मेरे पूज्य पिता की याद ...

माना अश्क रोक भी पाना
बस में नहीं आज तुम्हारे !
मेरी आँखों.... में भी छाये,
आये रह रह अश्क तुम्हारे !!
      ०००००००००
मेरे पिता मुझे और तुमको
आज विदा कर दूर गए हैं !
जीवन की इच्छाएं सारी..
सारे सपने ....चूर हुए हैं !!
        ०००००००
कभी इसी दिन को अक्सर
मैं कहता रहता था त्यौहार !
आज रुदन ने तेरे मेरे ...
मचा दिया माँ हाहाकार !!
       ०००००००००
मेरे इस कमजोर ह्रदय पर
भारी बहुत हैं तेरे आंसू ...!
तुझे दिलासा कैसे दे दूं
कैसे रोकूँ तेरे ये आंसू !!
       ००००००००
तुमने अपना सारा जीवन
जिसको सदा किया अर्पण !
कैसे निष्ठुर होकर वह ...
तोड़ गया सारे सुख बंधन !!
      ०००००००
रो रो आँखें सूख चली हैं
सूझे कोई राह नहीं .....!
माँ तू देख मुझे जी लेना
क्या तुझको मेरी चाह नहीं !!
       ००००००००
तूने ही मुझको सोंपे हैं
सच्चे जीवन के संस्कार !
मत रो मेरी प्यारी माँ तू
बेटा तुझसे कहे पुकार !!
       ००००००००
कैसा होगा जीवन अब यह
सोच कहीं चिंतित मत होना !
तूने प्राणों से सींचा था ..
में सुख तुझको दूंगा दूना !!
      ०००००००००
............राहुल गुप्ता स्पर्शी, ग्वालियर 09826347016

............."दूर होकर भी हो पास"




कल तुम बहुत दूर थी
यूं ..दूर हो आज भी ....!
पर ..दूर होकर भी ...
मेरे बिलकुल करीब हो ..
हो ...एकदम पास . ..!!
       ०००००००
कैसी होती हैं
ये पास वाली दूरियां ..
जहां जिस्मानी तौर पर
दूर होकर ..भी ...
रूहें हर पल ...
साथ साथ रहती हैं ...!!!
        ००००००००
और ...
क्या कमी है इस दूरी में
उस  "पास "  से
जहां कि नहीं हो ..
संवाद भी ...
नहीं हो चाह भी ....!!
और नहीं हो .........
पास होने का अहसास भी ....!!!!!
          ०००००००
राहुल गुप्ता स्पर्शी, ग्वालियर  09826347016

शनिवार, 16 जून 2012

ग़ज़ल ......जिन्दगी ...


जिन्दगी की हर ख़ुशी छोड़े हुए !
जी रहे हैं हम, कफ़न ओढ़े हुए !!
            ०००००००००००
जान से अपनी जुड़े गम ही रहे !
कभी हुए ज्यादा, कभी थोड़े हुए !!
...........जी रहे हैं हम कफ़न ओढ़े हुए !!
             ०००००००००
रिश्ता बनता ही गया वीराने से !
बरसों हो गए ..चमन छोड़े हुए !!
...........जी रहे हैं हम कफ़न ओढ़े हुए !!
            ०००००००००
जिसके क़दमों पे झुकी नज़रें रहीं !
चलते रहे हैं वो, कदम मोड़े हुए !!
...........जी रहे हैं हम कफ़न ओढ़े हुए !!
             ०००००००००
दिल को तेरे प्यार में तोड़े हुए !
यादों से इस जान को जोड़े हुए !!
...........जी रहे हैं हम कफ़न ओढ़े हुए !!
    ..........राहुल गुप्ता स्पर्शी, ग्वालियर 9826347016 

RUK JA...RUK JA......


.........."बंधन "..........


........."बंधन "..........
अहसास का बंधन 
अनजान सा बंधन !!
ताउम्र जो रहे जिन्दा 
जी-जान सा बंधन !!
     ०००००००००
रच गया जो सांस में है 
और नस नस में समाया !
जिसने तेरी सोच को भी 
अपना जीवन रस बनाया !!
      ००००००००००
प्यास को मत अश्क करदे 
आ निकल आ गफलतों से !
कोई रास्ता देखता है ..
जा गले मिल मुहब्बतों से !!
        ००००००००
शाम जीवन की न होगी 
पंक्षी ये उड़ ना सकेगा !
सांस में भी सांस भरकर 
वो तुझे जिन्दा रखेगा !!
       ००००००००००
कह न पाए तू अगर कुछ 
सुन रहा है बिन कहे ही !
कल सुबह सूरज उगेगा 
तेरी दुनिया जग मगेगी !!
         ००००००० 
 आ कि तेरी जिन्दगी में 
प्यार का श्रृंगार भरदूं ..!
तेरे हर बोझिल क्षणों में 
प्यार की सौगात भरदूं !!
     ० ००००००० 
बात क्यों टूटे ह्रदय की 
और फटती जिन्दगी की !
आ कि दस्तक द्वार पर है
तेरे घर पर हर ख़ुशी की !! 
       ०००००००० 
.......राहुल गुप्ता स्पर्शी, ग्वालियर 9826347016