लगता है
मैं भी स्याला
बकरा ही हूँ !
जब जिसे हलाल
करना होता है
खूब जिमाता है
खिलाता पिलाता है
मीठी मीठी बातों की
चाशनी ही सही
खुशामद का
चिकना चिकना
मक्खन ही सही !
अंत वही -
जो हर बकरे की
किस्मत है !
हलाल होना !!
होती ही रहती है
जब तब - "बकरीद"
चाहे मिंमियाएं
चाहे मुस्कुराएं
होना ही है शहीद !!
****** राहुल गुप्ता स्पर्शी, ग्वालियर ..
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