- यही मिले मुझको वरदान"
- जब जब जो कुछ मिला मुझे
- तब तब वो भरपूर लगा
- और अगर संतोष न होता
- मैं भी स्वर्ण महल को रोता
- हर सुख मुझको छोटा लगता
- ख्वाब असंभव से होते तो
- कौन उन्हें पूरा कर पाता
- उपरवाला भी तब मुझसे
- हाथ जोड़ लेता, कह देता
- तेरा मुहं सुरसा सा है जा
- तुझे नहीं दूंगा वरदान
- तेरा कोई सगा न होगा
- कि तुझसे हार गया भगवान
- इसीलिए मैंने वह देखा
- 'स्वप्न' कि जो मेरा हो जाये
- 'राह' कि जिस पर मैं चल पाऊँ
- इसीलिए जो मिला जगत मैं
- मुझको सदा अपार लगा
- छोटे घर में ..छोटे छोटे
- कुछ सुख के साधन भी पाए
- और मित्रता में भी मुझको
- कुछ साथी मिल गए महान
- दर्द मिले कम जीवन में
- और ख़ुशी अनगिनत मिली
- मैं उनसे क्यों तोलूँ खुदको
- जो सोने के व्यापारी हैं
- या उनसे जो काले धन को
- बढ़ा रहे कर भ्रष्टाचार
- और लोग वो लूटपाट कर
- करते सब पर अत्याचार
- मैं सुख पाता हूँ जब मुझको
- लगता है खा सका पेट भर
- क्योंकि यहाँ कईयों को मैंने
- देखा सोते ..भूखे पेट
- या उन घर वालों को देखा
- जिनके बच्चे उद्दंडी हैं
- और कहीं हैं वो बेचारे
- जिनके शीश महल तो हैं पर
- कुल दीपक तक नहीं जला है
- कभी कभी लगता है प्रभु ने
- मुझको दिए कई वरदान
- कम देखूं ...पर ज्यादा सोचूँ
- सबकी सुनूं ..खूब.. कम बोलूँ
- जो सुख मिले..रखूँ सर माथे
- जो दुःख मिलें ..उन्हें कम आंकूं
- सपने देखूं ..छोटे छोटे !
- औरों के कुछ काम आ सकूं
- यही मिले मुझको वरदान
- बना रहूँ सच्चा इंसान !!
- राहुल गुप्ता, ग्वालियर 9826347016
शुक्रवार, 13 जनवरी 2012
"यही मिले मुझको वरदान"
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