मंगलवार, 19 जून 2012

............."दूर होकर भी हो पास"




कल तुम बहुत दूर थी
यूं ..दूर हो आज भी ....!
पर ..दूर होकर भी ...
मेरे बिलकुल करीब हो ..
हो ...एकदम पास . ..!!
       ०००००००
कैसी होती हैं
ये पास वाली दूरियां ..
जहां जिस्मानी तौर पर
दूर होकर ..भी ...
रूहें हर पल ...
साथ साथ रहती हैं ...!!!
        ००००००००
और ...
क्या कमी है इस दूरी में
उस  "पास "  से
जहां कि नहीं हो ..
संवाद भी ...
नहीं हो चाह भी ....!!
और नहीं हो .........
पास होने का अहसास भी ....!!!!!
          ०००००००
राहुल गुप्ता स्पर्शी, ग्वालियर  09826347016

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