मंगलवार, 19 जून 2012

...........चेहरा तेरा


धरा के आँगन पे आसमां झुकाने आया हूँ  !
नदी की प्यास को सागर पिलाने आया हूँ !!
नज़र में बाँध लूं ..चेहरा तेरा.. खरा कुंदन !
ग़ज़ल की शान को..सोना बनाने आया हूँ !!
...........राहुल गुप्ता स्पर्शी, ग्वालियर 09826347016 

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