शनिवार, 16 जून 2012

.........."बंधन "..........


........."बंधन "..........
अहसास का बंधन 
अनजान सा बंधन !!
ताउम्र जो रहे जिन्दा 
जी-जान सा बंधन !!
     ०००००००००
रच गया जो सांस में है 
और नस नस में समाया !
जिसने तेरी सोच को भी 
अपना जीवन रस बनाया !!
      ००००००००००
प्यास को मत अश्क करदे 
आ निकल आ गफलतों से !
कोई रास्ता देखता है ..
जा गले मिल मुहब्बतों से !!
        ००००००००
शाम जीवन की न होगी 
पंक्षी ये उड़ ना सकेगा !
सांस में भी सांस भरकर 
वो तुझे जिन्दा रखेगा !!
       ००००००००००
कह न पाए तू अगर कुछ 
सुन रहा है बिन कहे ही !
कल सुबह सूरज उगेगा 
तेरी दुनिया जग मगेगी !!
         ००००००० 
 आ कि तेरी जिन्दगी में 
प्यार का श्रृंगार भरदूं ..!
तेरे हर बोझिल क्षणों में 
प्यार की सौगात भरदूं !!
     ० ००००००० 
बात क्यों टूटे ह्रदय की 
और फटती जिन्दगी की !
आ कि दस्तक द्वार पर है
तेरे घर पर हर ख़ुशी की !! 
       ०००००००० 
.......राहुल गुप्ता स्पर्शी, ग्वालियर 9826347016 

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