........."बंधन "..........
अहसास का बंधन
अनजान सा बंधन !!
ताउम्र जो रहे जिन्दा
जी-जान सा बंधन !!
०००००००००
रच गया जो सांस में है
और नस नस में समाया !
जिसने तेरी सोच को भी
अपना जीवन रस बनाया !!
००००००००००
प्यास को मत अश्क करदे
आ निकल आ गफलतों से !
कोई रास्ता देखता है ..
जा गले मिल मुहब्बतों से !!
००००००००
शाम जीवन की न होगी
पंक्षी ये उड़ ना सकेगा !
सांस में भी सांस भरकर
वो तुझे जिन्दा रखेगा !!
००००००००००
कह न पाए तू अगर कुछ
सुन रहा है बिन कहे ही !
कल सुबह सूरज उगेगा
तेरी दुनिया जग मगेगी !!
०००००००
आ कि तेरी जिन्दगी में
प्यार का श्रृंगार भरदूं ..!
तेरे हर बोझिल क्षणों में
प्यार की सौगात भरदूं !!
० ०००००००
बात क्यों टूटे ह्रदय की
और फटती जिन्दगी की !
आ कि दस्तक द्वार पर है
तेरे घर पर हर ख़ुशी की !!
००००००००
.......राहुल गुप्ता स्पर्शी, ग्वालियर 9826347016
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